गणेश पूजा का महत्व

हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ अथवा नए आयोजन का प्रारंभ श्री गणेश जी के पूजन से किया जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता एवं प्रथम पूज्य देवता माना गया है — मान्यता है कि उनकी पूजा से कार्य में आने वाली सभी बाधाएँ दूर होती हैं और कार्य निर्विघ्न सम्पन्न होता है। नाशिक में गणेश चतुर्थी के अवसर पर घर-घर में गणपति स्थापना एवं पूजा की परंपरा अत्यंत श्रद्धा से निभाई जाती है।

ध्यान दें: गणेश पूजा की विधि अवसर के अनुसार (गणेश चतुर्थी स्थापना, सामान्य पूजन अथवा किसी अन्य पूजा से पूर्व का गणेश-पूजन) थोड़ी भिन्न हो सकती है। बुकिंग के समय पंडित रवि त्रिपाठी जी आपकी आवश्यकता अनुसार पूरी जानकारी व्हाट्सऐप पर भेज देंगे।

गणेश पूजा कब-कब करवाई जाती है

  • गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना एवं दैनिक पूजन हेतु
  • किसी भी अन्य पूजा (सत्यनारायण पूजा, गृह-प्रवेश आदि) से पूर्व विघ्न-निवारण हेतु प्रारंभिक गणेश-पूजन
  • नई दुकान, कार्यालय अथवा व्यापार के शुभारंभ पर
  • नए घर में प्रवेश या गृह-निर्माण के शुभारंभ पर
  • विवाह, मुंडन, नामकरण जैसे मांगलिक कार्यों के प्रारंभ में

आवश्यक पूजा सामग्री सूची

  • श्री गणेश जी की प्रतिमा/मूर्ति
  • तांबे/पीतल का कलश
  • दूर्वा (दूब घास)
  • लाल फूल व फूलों की माला
  • मोदक/लड्डू (भोग हेतु)
  • सिंदूर व चंदन
  • अक्षत (साबुत चावल)
  • दीपक, घी व रुई की बत्ती
  • जनेऊ (यज्ञोपवीत)
  • नारियल (साबुत)
  • पान के पत्ते व सुपारी
  • धूप-अगरबत्ती व कपूर

गणेश पूजा की विधि

1. स्थापना-स्थल की शुद्धि

पूजा-स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर, स्वच्छ आसन पर लाल वस्त्र बिछाकर श्री गणेश जी की प्रतिमा या मूर्ति की स्थापना की जाती है।

2. आवाहन व प्राण-प्रतिष्ठा

यदि गणेश चतुर्थी की स्थापना है तो मूर्ति में विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा एवं आवाहन किया जाता है, अन्यथा साधारण पूजन में भगवान का आवाहन कर पूजन प्रारंभ होता है।

3. षोडशोपचार पूजन

स्नान, वस्त्र, चंदन, सिंदूर, दूर्वा, पुष्प, धूप-दीप एवं मोदक के भोग सहित 16 उपचारों से भगवान गणेश का पूजन किया जाता है। दूर्वा अर्पण गणेश पूजा का विशेष एवं अनिवार्य अंग माना जाता है।

4. मंत्रोच्चार व आरती

गणेश स्तुति व मंत्रों के उच्चारण के पश्चात आरती की जाती है, घंटी बजाकर सभी भक्त पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।

5. प्रसाद वितरण

मोदक अथवा लड्डू का भोग भगवान को अर्पित कर, प्रसाद रूप में उपस्थित सभी भक्तों में वितरित किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परंपरा के अनुसार किसी भी शुभ कार्य या पूजा से पहले श्री गणेश जी का पूजन करना शुभ एवं विघ्न-निवारक माना जाता है, इसलिए इसे अवश्य सम्मिलित किया जाता है।

पंडित रवि त्रिपाठी जी पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त बताते हैं, ताकि स्थापना एवं पूजन शुभ समय में सम्पन्न हो सके। बुकिंग के समय अपनी तिथि व समय पर चर्चा कर सकते हैं।

जी हाँ, पंडित रवि त्रिपाठी जी नाशिक शहर एवं आसपास के क्षेत्र में घर, दुकान अथवा कार्यालय — जहाँ भी आवश्यकता हो, स्वयं आकर पूजा करवाते हैं।

गणेश पूजा बुक करनी है?

पंडित जी से सीधे बात करें और अपनी सुविधानुसार तिथि व समय निश्चित करें।

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