गृह प्रवेश पूजा क्यों की जाती है?

गृह प्रवेश पूजा नए घर में प्रवेश करने से पूर्व की जाने वाली वास्तु-शांति पूजा है। मान्यता है कि इस पूजा से घर की भूमि व वास्तु से जुड़े सभी दोष शांत होते हैं, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा घर में सुख, समृद्धि एवं शांति का वास होता है। नाशिक में नए घर, फ्लैट या बंगले में प्रवेश से पहले यह पूजा शुभ मुहूर्त में करवाई जाती है।

ध्यान दें: गृह प्रवेश तीन प्रकार का माना गया है — अपूर्व (नए बने घर में पहला प्रवेश), सापूर्व (कुछ समय बाहर रहकर पुनः प्रवेश) एवं द्वंद्विक (आपदा के बाद पुनर्निर्माण के बाद प्रवेश)। बुकिंग के समय पंडित रवि त्रिपाठी जी आपकी स्थिति अनुसार सही विधि व मुहूर्त बताएँगे।

गृह प्रवेश हेतु शुभ मुहूर्त

गृह प्रवेश हमेशा शुभ तिथि, नक्षत्र एवं मुहूर्त देखकर ही करना चाहिए। सामान्यतः वसंत, ग्रीष्म एवं शरद ऋतु के महीनों को इसके लिए शुभ माना जाता है, तथा कुछ विशेष मास (जैसे चातुर्मास) में गृह प्रवेश वर्जित माना जाता है। सटीक मुहूर्त पंचांग देखकर ही तय होता है — बुकिंग के समय पंडित रवि त्रिपाठी जी आपकी तिथि के अनुसार शुभ मुहूर्त बता देंगे।

आवश्यक पूजा सामग्री सूची

  • तांबे का कलश (पूर्ण जल सहित)
  • आम के पत्ते व नारियल
  • श्री गणेश व नवग्रह पूजन सामग्री
  • दीपक, घी व रुई की बत्ती
  • फूल व फूलों की माला
  • आम के पत्तों का तोरण (द्वार हेतु)
  • हल्दी, कुमकुम, चंदन, अक्षत
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • दूध (उबालने हेतु — प्रवेश के समय)
  • हवन सामग्री व आम की लकड़ी (हवन हेतु)
  • नई मिट्टी के दीये
  • मिठाई व फल (भोग हेतु)

गृह प्रवेश पूजा की विधि

1. वास्तु-पूजन

घर की नींव एवं भूमि के वास्तु-पुरुष का पूजन कर, भूमि से जुड़े दोषों की शांति की जाती है।

2. गणेश एवं नवग्रह पूजन

सर्वप्रथम विघ्नहर्ता श्री गणेश जी का पूजन कर, तत्पश्चात नवग्रहों की शांति हेतु पूजन किया जाता है, ताकि ग्रह-दोष निवारण हो सके।

3. मुख्य द्वार पूजन

घर के मुख्य द्वार को आम के पत्तों के तोरण, हल्दी-कुमकुम व रंगोली से सजाकर उसका पूजन किया जाता है — यही वह स्थान है जहाँ से गृहस्वामी परिवार सहित प्रवेश करेंगे।

4. हवन

वास्तु-शांति हेतु हवन किया जाता है, जिसमें आम की लकड़ी व हवन सामग्री की आहुति दी जाती है ताकि घर की वायु शुद्ध हो एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।

5. गृह प्रवेश

शुभ मुहूर्त में गृहस्वामी दाहिने पैर से जल भरा कलश हाथ में लेकर घर में प्रवेश करते हैं। साथ ही दूध उबाला जाता है (जो मांगलिक शुभ संकेत माना जाता है) और घर के सभी कमरों में दीप प्रज्वलित किए जाते हैं।

6. आरती व प्रसाद वितरण

गृह प्रवेश के पश्चात आरती की जाती है तथा उपस्थित सभी परिजनों व पड़ोसियों में प्रसाद वितरित किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सामान्यतः वास्तु-पूजन, हवन एवं गृह प्रवेश की संपूर्ण विधि में 2 से 3 घंटे का समय लगता है, यह घर के आकार व विधि की विस्तृति पर निर्भर करता है।

जी हाँ, नए किराए के घर में प्रवेश से पूर्व भी संक्षिप्त वास्तु-शांति पूजन करवाया जा सकता है, जिससे घर में सकारात्मकता बनी रहे।

जी हाँ, पंडित रवि त्रिपाठी जी पंचांग देखकर आपकी सुविधा अनुसार गृह प्रवेश हेतु शुभ तिथि व मुहूर्त बताते हैं — बुकिंग के समय अपनी संभावित तिथियाँ बता सकते हैं।

गृह प्रवेश पूजा बुक करनी है?

पंडित जी से सीधे बात करें और अपनी सुविधानुसार शुभ मुहूर्त निश्चित करें।

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